क्यों वेवजह असीम को, किया गया गिरफ्तार
जमानत लेने से भी, साफ किया इंकार
साफ किया इंकार, राज्नीति हुई मैली
उनके कार्टून से, कहीं क्या हिंसा फैली
हाँ! गुल खिलाएगी, अब उनकी गिरफ़्तारी
पकड़ने वाले खुद, हैं देशद्रोही भारी
दिखावे का कर रहे, मनमोहन जी खेल
करीबी लोगों को, भेज रहे हैं जेल
भेज रहे हैं जेल, करेंगे दल का खात्मा
कबुलती जिसे कहाँ, उनकी कलंकित आत्मा
गद्दी के बने हैं, क्यों इस तरह लोभी
सीझा रहे संसद में बैठकर वे गोभी
जिनके नाक के पीछे , घपलों का अंबार
कहते कैसे लोग हैं , उसे ईमानदार
उसे ईमानदार , चारो तरफ घोटाला
कालों के बीच क्या , अपने नहीं है काला
छोटी मछलियों पर , कसा रहा सिकंजा
देखकर डरते हैं , बड़ी मछली का पंजा
गद्दी मिर्ची की तरह , लगती अब तो तीत
मनमोहन जी देखते , हो जाते भयभीत
हो जाते भयभीत , उसे काठी मारेंगे
बैठने के वास्ते , इक पीढ़िया लायेंगे
उसपर पलथियाकर , हर कम निपटायेंगे
देखेंगे विपक्ष तब , किस तरह लुढ़कायेंगे
सत्ताधारी बने हैं ,प्रायः कोयला चोर
दिखावे में करते हैं , जगह जगह ही शोर
जगह जगह ही शोर ,क्यों ना देखते शीशा
कहर बरपाते हैं , जाकर वहीं ओडीसा
यह तो हुई चोरी और है सीना जोरी
जनता के बीच क्यों न बंटवाते कटोरी
आरक्षण उपर आरक्षण,क्या करती सरकार
मंहगाई , भ्रष्टाचार से कुछ न सरोकार
से कुछ न सरोकार , करवाते सिर्फ हल्ला
क्लीन बोल्ड हो गए , पर चमका रहे बल्ला
पता नहीं किधर है , अब गिल्ली और खुट्टा
हाँफ रहे पीच पर , मनमोहन भाय छुट्टा
शिक्षक दिवस की धूम है ,स्कूलों में हर ओर
हो गए हैं बच्चे सब ,बिल्कुल भाव विभोर
बिल्कुल भाव विभोर , लगते हैं सभी प्यारे
कतारबद्ध में चल रहे बच्चे सब सारे
किनकी कृपा से यह , शिक्षक दिवस हम मनाते
सर्वपल्ली को दिलों में इसी रोज बसाते